जय गुरु देव
प्रेस नोट: 23.08.2022 महोबा (उ. प्र.)
अगर सतयुग आ गया तो इसी में बहुत से जीव निकल जाएंगे
महापुरुषों का काम संकल्प मात्र से हो जाता है
पूरी मानवता की भलाई के बारे में सोचने वाले, विश्व स्तर पर योजना बना कर काम करने वाले, काल के जाल से ज्यादा से ज्यादा जीवों को निकलने में लगे और अपने प्रेमियों को भी लगाने वाले वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने जन्माष्टमी के अवसर पर 19 अगस्त 2022 प्रातःकालीन बेला में महोबा (उ.प्र.) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि प्रेमियों को जीवों को बचाने, गुरु के मिशन में लगने की जरूरत है।
सन्तों का संकल्प पूरा होता ही होता है
अगर खाने पहनने रहने की दिक्कत होगी, दिमाग में टेंशन होगा, परेशानियां होंगी तो यह दोनों काम भजन भाव भक्ति का नहीं हो सकता है। वह समस्या अगर दूर हो गई तो भजन भाव भक्ति के लिए पूरा टाइम रहेगा जैसे सतयुग में नो टेंशन जोन था, ऊपर भी और इस धरती पर भी। एक बुवाई पर 27 बार काटते थे। नो टेंशन। गुरु का संकल्प सतयुग अगर आ जाये तो सब काम हो जाये। सन्तों का जो संकल्प पूरा होता ही होता है। वो जो बोल देते हैं, वह होकर ही रहता है। सन्त वचन पलटे नहीं पलट जाय ब्रह्मांड।
थोड़े समय के लिए ही अगर सतयुग आ गया तो इसी में तो बहुत से जीव निकल जाएंगे
ऊपर (के लोकों) का कानून जल्दी नहीं बदलता है लेकिन उसमे भी गुंजाइश हो जाती हैं, सन्तों की मर्जी के अनुसार बदलाव आ जाता हैं। जैसे भारत के संविधान में गुंजाईश है कि फांसी की सजा पाए को राष्ट्रपति दया करके फांसी से बचा सकता है। तो नियम में परिवर्तन हुआ। गुरु महाराज ने यह नहीं कहा कि कलयुग चला जाएगा, सतयुग आ जाएगा। उन्होंने कहा कलयुग में सतयुग ही आएगा। उन्होंने उसमें जगह बनाया उस प्रभु से कह करके। सतयुग के अच्छे वातावरण में बहुत से जीव भजन करके पार हो जाएंगे। वह समझने लगेंगे हर चीज को। जैसे भारत का राष्ट्रपति किसी को एक दिन एक घंटे के लिए बना दिया जाए तो उसके दिमाग में जो चीज रहेगी, अपनी पावर के अनुसार वही कर डालेगा। थोड़े समय के लिए ही अगर सतयुग आ गया तो इसी में बहुत से जीव निकल जाएंगे।
पहले कर्मों के विधान बनने, परीक्षण करने में लगे समय में करोड़ो अरबों जीव अपने घर चले गये थे
कर्मो का विधान जब नहीं बना था तो सब जीव अपने घर चले जाते थे बाद में कर्मों के विधान में फंसे। कर्मों का विधान जब बना तो उसको लागू करने में, परीक्षण करने में समय लगा तब तक तो खेप की खेप पार हो गई थी, करोड़ो अरबों जीव अपने घर चले गए थे। गुरु महाराज की सोच की कलयुग में कलयुग जाएगा, कलयुग में सतयुग आएगा। यह सब सौ टके की बात सिद्ध होगी और सौ टके की बात यह है। लेकिन इसके लिए आपको लकड़ी लगाना पड़ेगा। जैसे गोवर्धन पर्वत कृष्ण ने उठाया, गोपी ग्वालों ने केवल लकड़ी लगाया था और श्रेय उनको भी मिल गया।
जटायु का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा है।
काम तो हो चुका है, आप श्रेय ले लो
काम तो हो जाएगा, काम होने में देर नहीं है। महापुरुषों का काम संकल्प मात्र से हो जाता है। जैसे कल हमने आपको सुनाया था कि कृष्ण का संकल्प पहले पूरा हो गया था। अर्जुन को उन्होंने दिखाया था देखो सब मरे पड़े हुए हैं, तुमको केवल निमित्त बनना है, तीर धनुष लेकर के आंख बंद करके मैदान में तीर छोड़ना है, काम तो पहले ही हो गया था। ऐसे ही महापुरुषों का काम हो जाता है। बोलो जयगुरुदेव।
