जय गुरु देव
प्रेस नोट: 22.08.2022 महोबा (उ. प्र.)
गुरु के सच्चे पूत बन जाओगे तो जिधर भी जयगुरुदेव बोल करके निकल पड़ोगे, कामयाब हो जाओगे
बाप-बेटे का रिश्ता कई बार बना लेकिन गुरु-शिष्य का एक ही बार होता है, अबकी गुरु भक्ति करने का मौका मिला है
ऐसा उपाय बताने वाले जिससे काल भी दयाल के समान मदद करने लगता है, गुरु भक्ति कमाने के मिले दुर्लभ अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने वाले, हर तरह के बहाने एक्सक्यूज़ का भी समाधान बता कर असला चीज में जीव को लगाने वाले वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने जन्माष्टमी के अवसर पर 19 अगस्त 2022 प्रातःकालीन बेला में महोबा (उ.प्र.) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि अंतर में कर्मों की सफाई के लिए गुरु मददगार होते हैं।
गुरु खुश तो काल खुश, गुरु रूठे तो काल बने विकराल
गुरु का खुश होना है भारी। लेकिन आदेश पालन करने वाले पर गुरु बहुत जल्दी खुश हो जाते, रीझ जाते हैं। आदेश का उल्लंघन करने, गुरु के नाम काम में बाधा डालने वाले से मुख मोड़ लेते हैं। फिर गुरु माथे से उतरे, ताको काल घसीटिये बचा सके न कोय। काल अपनी तरफ खींचता है। शुरू में सुख सुविधाएं दे कर फिर रगड़ाई करता है। गुरु की दया होने पर काल, दयाल का काम करता है और दया हटने पर विकराल रूप धारण करता है फिर उसको नहीं छोड़ता। गुरु की जरूरत यहां भी और वहां भी है। सतलोक में पहुंच कर रानी इंदुमती बोली कि अब मुझे पता चल गया कि आपमें और इस धनी, देश के मालिक में कोई अंतर नहीं रह गया।
गुरु के सपूत बन जाओगे तो रास्ता खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी
गुरु महाराज को बराबर सर पर सवार रख कर चलो और उनके सपूत बन जाओ। सपूता और कपूत दो होते हैं। जो नाम को मिटाते हैं, खानदान में कलंक बन जाते हैं वो कपूत। और सपूत वो जो नाम को आगे बढ़ाते, ऊंचा करते हैं। लोग यह कहने लग जाते हैं कि यह उनके नाती पोता बेटा है। नाम किसका होता है? बाप दादा बाबा का होता है। तो आप सपूत बन जाओ फिर रास्ता खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लीक छोड़ तीनो चलें शायर सिंह सपूत।।
सपूत, सच्चे पूत, सच्चे बेटा बन जाओ। उनके मिशन को आगे बढ़ाने में लग जाओ तो तुमको किसी पंथ, रास्ते की जरूरत नहीं रह जाएगी। जिधर भी जयगुरुदेव नाम बोल करके निकल पड़ोगे, कामयाब हो जाओगे। इसलिये प्रेमियों हमेशा गुरु को मस्तक पर सवार रखो और गुरु के काम नाम को आगे बढ़ाने में अपनी औकात भर, शक्ति भर हमेशा प्रयास करते रहो।
बाप-बेटे का रिश्ता कई बार बना लेकिन गुरु-शिष्य का एक ही बार होता है, अबकी गुरु भक्ति करने का मौका मिला है
भगवान की पूजा किसके द्वारा होती है? भगवान का महत्व उनके भक्तों से होता है। श्रेय देते हैं उनको। यह जुड़े हुए रहते हैं जैसे एक सिक्के के दो पहलू होते हैं ऐसे ही संत और सन्त के जीव होते हैं। ऐसे गुरु और शिष्य होते हैं जिस तरह से जुड़े हुए होते हैं। बाप बेटे का रिश्ता तो बहुत बार हुआ लेकिन गुरु-शिष्य का रिश्ता एक ही बार हुआ करता है फिर तो मौका ही नहीं देते हैं। जो गुरु भक्ति कर लेते हैं, गुरु के आदेश का पालन कर लेते हैं उनको एक ही जन्म में पार कर देते हैं। हम आए वही देश से जहां तुम्हारा धाम। केवल एक लक्ष्य उनका हुआ करता है।
कर्मों को जब काटोगे तब तो गुरु भक्ति आएगी
मुक्ति पाने के लिए पहले तो कई जन्म लेने पड़ते थे। लेकिन अब तो कुछ नहीं। गुरु महाराज ने कहा हम तो यह चाहते हैं बगीचा भी तुम लगाओ, फल भी तुम खाओ। थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। कर्मों को काटोगे तब तो गुरु भक्ति आएगी तब तो भाव बनेंगे तब तो आप पर दया होगी। शरीर से ज्यादा कर्म आते हैं इसलिए शरीर से ज्यादा सेवा करो। सन्तों के पास बहुत तरह के जीव आते हैं। खाली कोई नहीं जाता। जो जिस चीज की रट लगाए रहते हैं उसे वो चीज मिल जाती है और फिर उसमें फंस जाते हैं। और जो गुरु पर छोड़ देते हैं, जाहि विधि राखे गुरु ताहि विधि रहिये, जब ये भाव आ जायेगा कि गुलाम की कोई ख्वाहिश नहीं होती तो उसके लिए पहले से इंतजाम गुरु कर देते हैं क्योंकि अपने बेटा को कोई नंगा भूखा नहीं रखना पसंद करता।
टाइम टेबल बनाओ, समय का भी दसवां अंश निकालो, नए नामदानियों से संपर्क बनाए रखो
शरीर से ज्यादा तकलीफ होती है। धन हो जाता है तो लोग कहते हैं चन्दा दे दो। धन देने से बरकत बढ़ती है। मेहनत की कमाई का दसवां अंश देने से लक्ष्मी बढ़ती खुश होती थी। कुछ गुरु से धन ही मांगते रहे, अब भी दुनिया की चीज बीमारी, धन, नौकरी आदि ही मांगते हैं। एक मांगो तो पा भी जाओ। इतनी लंबी लिस्ट है तो उसे कौन भोगेगा? ज्यादा गंदगी लगा के आओ तो जल्दी कोई धोएगा भी नहीं, कौन बार-बार धोएगा। तो लक्ष्मी बढ़ तो जाती है लेकिन रात को नींद नहीं आती, हाथ-पैर में दर्द आदि बहुत समस्याएं। इसलिए समय का भी दसवां अंश निकालो, तन की सेवा भी करो। सबके पास टाइम है। टाइम टेबल, रूटीन बनाओ, समय निकाल आएगा। अच्छे लड़के दिन भर थोड़े पढ़ते हैं। पढ़ते हैं, खेल भी लेते हैं, समाचार भी सुन लेते हैं लेकिन सब काम मन लगा कर। और मन गुरु के बताए रास्ते सेवा सतसंग और भजन से मन रुकता है। बराबर साप्ताहिक मासिक सतसंगों में जाते रहना चाहिए। सब नामदानी इकट्ठा होकर अपने-अपने गांव में साप्ताहिक सतसंग करो। नए नामदानियों से संपर्क बराबर बनाये रखो, सन्त मत के बारे में बताते रहो तो वापस भटकेंगे नहीं। एक दिन की रगड़ाई में बड़े कर्म नहीं धुलते जैसे कपड़े पर बड़ा दाग बार-बार धुलाई मांगता है। तो उन्हें बार-बार प्रचार, सतसंग में ले जाओ। ये मत सोचो नामदान देने और लेने वाला जाने। अभी आपकी छुट्टी नहीं। बराबर सतयुग लाने का काम करो। बोलो जयगुरुदेव।
