जय गुरु देव
प्रेस नोट: 24.08.2022, रेवाड़ी (हरियाणा)
मुसीबत के समय यदि मुंह से जयगुरुदेव नाम निकला तो मालिक कोई रास्ता निकाल देगा, जान बच जाएगी
चेतन जीवात्मा की ताकत से जड़ मन गतिविधियां जारी कर इंद्रियों के घाट पर बैठ कर रस लेता रहता है
जब जान पर आफत आ जाये, कोई मदद करने वाला न हो, सब तरफ से निराशा मिले तब ऐसी भारी इमरजेंसी में तत्काल निश्चित मदद मिलने का रास्ता बताने वाले, सब लोगों को जयगुरुदेव नाम की लाइफलाइन देने वाले, साधना में तरक्की के लिए दृढ़ संकल्प बनवा कर बुराईयां गिन-गिन कर छुड़वाने वाले, इस समय के पूरे सन्त सतगुरु, जीवों को अपने असली घर सतलोक पहुंचने का रास्ता नामदान देने वाले उज्जैन के बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बावल आश्रम, रेवाड़ी (हरियाणा) में 12 अगस्त 2021 प्रातःकाल में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर प्रसारित संदेश में बताया कि जयगुरुदेव नाम कोई भी बोले दोहराना चाहिए और यह उसका शुक्र समझना चाहिए कि कम से कम हमसे बुलवाया तो नहीं तो हम चुपचाप बैठे रहते।
संकट में जयगुरुदेव नाम बोला तो मदद हो जाएगी
मुंह से अच्छी बातें अच्छी चीज नहीं निकलती हैं तो भगवान का नाम इस समय घोर कलयुग में कैसे मुंह से निकलेगा? इसीलिए जयगुरुदेव नाम कोई भी कभी भी बोले, उसको दोहराना चाहिए। जहां जैसी परिस्थिति हो वैसा करना चाहिए। धीरे बोलने वाली जगह पर धीरे और तेज बोलने वाली जगह पर तेज बोला जाए। दूसरों के कान में तो भगवान का नाम पड़े, चाहे बोले न बोले, कम से कम सुनेगा तो और अगर सुनेगा नहीं समझेगा नहीं तो फिर वह कैसे इस नाम से फायदा उठा पाएगा। बोलने की बराबर आदत डालो और मुसीबत के समय यदि मुंह से निकला तो समझ लो उम्मीद बन गयी बचने की। जान का खतरा है और मुंह से जयगुरुदेव निकल गया तो आवाज वहां ऊपर मालिक के पास पहुंच जाएगी और वह कोई रास्ता निकाल देगा जान बच जाएगी। यह पक्की बात आपको समझने की जरूरत है।
मन, काल का अंश है
काल भगवान को श्याम सुंदर कहा गया। श्याम यानी काला रंग। मन काल भगवान का अंश है तो उनके रंग रूप पर, गुणों में जाएगा मतलब उनकी जो कार्य प्रणाली है, अच्छाई बुराई है उस पर जाता है। जितने भी (महापुरुष अवतारी शक्तियां) वहां से भेजे गए उन्होंने दोनों काम किया, सज्जनों की रक्षा, दुराचारियों का संहार। इसी काम के लिए भेजे गए थे। काल अगर रक्षा न करवाता तो सब मारकाट करते नर्क चले जाते तो सृष्टि कैसे चलती। इसलिए वहां से दोनों धार उतरी। कहा राम ने-
शुभ और अशुभ दोनों कर्मों का फल मैं देने वाला हूं। अच्छा करने वाले को अच्छा फल और बुरा करने वाले के लिए मैं बुरा हूँ, बुरा फल देता हूं। मन काल का अंश है। (माफी देने का अधिकार केवल सन्तों को होता है)
जड़ मन चेतन जीवात्मा के साथ हमेशा लगा रहता है
चलाने के लिए उन्होंने माया को डोर दे दिया। सुरत काल के अधीन हो गई, बेबस हो गई। मन को लगा दिया जीवात्मा के साथ। हमेशा लगा रहता है। मन रस लेने के लिए इंद्रियों के पास आया भी लेकिन ताकत जीवात्मा की ही रहती है। ऐसे तो मन चेतन नहीं है लेकिन जीवात्मा के ताकत से चेतनता आती हैं। मन तो है जड़। जड़ वो जो एक जगह से दूसरी जगह आ जा न सके जैसे पेड़ पौधे पत्थर जड़ हैं। जीवात्मा की ताकत से मन गतिविधियां जारी करता है, रस लेता है इंद्रियों के घाट पर बैठकर के जैसे आंख के पास बैठ कर के देखने का रख लेता है। जिस चीज में मन लग गया उस चीज को दिखाता ही दिखाता है।
संकल्प बनाओ कि मोबाइल में हम अच्छी चीजें ही देखेंगे
कुछ ऐसे लोग हैं 80 साल के बुड्ढे जिन्हें रात को रजाई के नीचे मोबाइल में फोटो, नाच गाना देखे बिना नींद नहीं आती है। मोबाइल में अच्छी चीजें समाचार भी आता है मगर फोटो, नाच गाना या और कोई चीज देख लिया तो फिर मन नहीं मानता है, उंगली उसी पर चलती रहती हैं। मना नहीं करते, मोबाइल बहुत अच्छी चीज है। उनमें अच्छी चीजें भी रहती हैं। बस यही संकल्प बनाया जाए कि हम अच्छा ही इसमें देखेंगे, बुराई वाली बात आएगी जिसमें हमारा मन रम जाये, चला जाये तो उधर आंख ही नहीं खोलेंगे, बंद ही कर देंगे।
अगर मन मोबाइल मे गंदी चीज़ या नाच गाना देख लिया तो रोज दिखायेगा ही दिखायेगा
लेकिन अब मन का स्वभाव है एक बार दो बार तीन बार में कोशिश करता है। माया डोर खींचती है, अरे चल आज देख ले कल मत देखना परसो मत देखना। अब मन लग गया तो दिखाएगा ही दिखाएगा। अब ध्यान भजन में भी वही अक्स, पिक्चर, चुटकुले, हंसी मजाक आ जाता है। समझ लो एक म्यान में दो तलवार नहीं रह सकती है। इसलिए ध्यान रखो।
