जय गुरु देव
प्रेस नोट: 20.08.2022 दुर्गापुर (प. बंगाल)
अगर शरीर से जीवात्मा निकल गई तो सोचो कहां जाओगे
दुनिया से जाने पर सन्त अपनाए हुए जीवों की डोर उत्तराधिकारी जानशीन को सौंप देते हैं
विश्व विख्यात बाबा जयगुरुदेव जिनके लिए 2007 में मौज फर्मा कर गए कि उनके जाने के बाद ये ही पुरानों की संभाल करेंगे और नयों को नामदान देंगे, जिन्हें अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी घोषित करके गए ऐसे वारिस, गुरु की याद और गुरु से प्रेम निरंतर बनाये रखने के लिए बराबर प्रेरणा देने वाले, एक तरह से शार्ट कट में निज घर पहुंचाने का मार्ग बताने वाले, गफलत में समय खराब करने से सावधान करने वाले, समय से चलने की सीख देने वाले, अपने अपनाये हुए जीवों की पूरी जिम्मेदारी निभाने वाले, इस समय धरती पर मनुष्य शरीर में आये स्वयं प्रभु, मौजूदा वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 15 अगस्त 2022 प्रातःकालीन बेला में दुर्गापुर (प. बंगाल) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि खाने पीने, मौज मस्ती में ही अगर लगे रहोगे तो समय निकल जाएगा। कहते हैं चार दिन की चांदनी, फिर अंधेरी रात। यह जिंदगी खत्म हो जाएगी। जो उम्र मिली है, धीरे-धीरे रोज खत्म होती जा रही है। दिन को सफेद और रात को काला चूहा बताया गया। दोनों रोज-रोज उम्र को कुतर रहे, काट रहे, खत्म कर दे रहे हैं।
घड़ी की सुई बता रही है एक-एक सेकेंड एक-एक मिनट का समय निकाला जा रहा है
महीना तारीख तिथि घड़ी याद दिलाती है एक-एक सेकंड सुई आगे बढ़ती है, एक-एक मिनट के समय को खत्म करती जाती है। समय निकलता जाता है और एक समय 12 बजे का ऐसा आता है जब दोनो सुइयां हाथ जोड़ देती है अब आगे नहीं। ऐसे ही आदमी का एक दिन बारह बजना है।
अगर शरीर से जीवात्मा निकल गई तो सोचो मौत के बाद कहां जाओगे
एक दिन यह शरीर, जीवात्मा का साथ छोड़ देगा तो सोचो कहां जाओगे? नर्कों में कि चौरासी में कि अपने वतन अपने मालिक के पास कि स्वर्ग में कि बैकुंठ में जाओगे? कहां जाओगे? कभी सोचा है? आपको सोचने की जरूरत है।
यदि आप गुरु को भूल जाओगे तो वो आपकी मदद कैसे करेंगे
आप भाग्यशाली हो जिनको गुरु महाराज जैसे गुरु मिले। इतने समर्थ गुरु पीछे के दिनों में आए ही नहीं। जितने भी महापुरुष आए सब थोड़ी ही कला ले करके आते रहे। गुरु महाराज तो अनंतों कला लेकर के आए। गुरु महाराज ने बहुत मेहनत किया, जीवों को धोया साफ किया, अपनाया, रास्ता बताया, नाम की मणि को अंदर रखा, नाम जड़ी दी, कहा गया- गुरु ने दीन्हा मुझे अजब जड़ी, और रास्ता बता करके कितने ही लोगों को मंजिल तक पहुंचा दिया। जो उनके शिष्य नामदानी हो, आप बड़े भाग्यशाली हो लेकिन आप गुरु को जब भूल जाओगे, गुरु को याद नहीं रखोगे, कहोगे गुरु महाराज तो चले गए तो गुरु कैसे मदद करेंगे?
नामदान देने के बाद सन्त अपने अपनाये हुए जीवों की हर तरह से पूरी संभाल करते रहते हैं
जिनको गुरु नामदान देते हैं, काल के हाथ से डोर को लेकर के अपने हाथ में ले लेते हैं और संसार से अगर चले भी जाते हैं तो उनकी संभाल के लिए जिसको काम सौपते हैं, जिनको आदेश देते हैं कि ये हमारे काम को देखेंगे, जिनको आध्यात्मिक उत्तराधिकारी कहते हैं, वह संभाल करते हैं लेकिन डोर उन्हीं के हाथ में रहती है। उद्धार की है शक्ति अपार गुरुदेव तुम्हारे चरणों में। त्रिकुटी तक वो आया करते हैं। गुरु महाराज आपके लिए बेताब है। जब तक गुरु महाराज का एक भी जीव यहां रहेगा, बराबर अंदर में संभाल करने करवाने के लिए आते रहेंगे। आपको दोबारा क्यों आना पड़े? पहले चार जन्म लगता था। प्रथम जन्म गुरु भक्ति कर, जन्म दूसरे नाम, तीसर जन्मे मुक्ति पद, चौथे में निजधाम। चार जन्म पार होने में लगता था लेकिन अभी तो गुरु की दया प्रेमियों इतनी चल रही है कि एक ही जन्म में अगर आदेश का पालन कर ले जाओ तो पार हो जाओगे। इसलिए भजन ध्यान सुमिरन सब नामदानी करते रहो।
