तरीके से अगर ध्यान लगाओगे तो उजाले में चले जाओगे, ऊपर कण-कण में हैं प्रकाश-सन्त उमाकान्त जी

 जय गुरु देव

प्रेस नोट: 03.09.2022, झारसुगुड़ा (ओडिशा)


नामदान दिलाकर सुमिरन ध्यान भजन में लगाना, अंतर में जीवात्मा को खुराक दिलाना बहुत बड़ी है सेवा

सन्तों का सतसंग न मिलने से जान-अनजान में बने खराब कर्मों की सजा की माफी करवाने का अधिकार रखने वाले, कोई भी जिनके दर से खाली नहीं जाता, लेकिन बादशाह से रुपया-दो रुपया नहीं मांगा जाता तो ऐसा क्या मांगा जाए कि इस दुनिया की दुःख तकलीफों में स्थाई आराम तो मिले ही, साथ ही साथ मृत्यु के बाद आत्मा के उद्धार कल्याण मोक्ष की व्यवस्था भी अभी जीवित में ही हो जाये, ऐसे सब तरह के उपाय तरीके बता देने वाले इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु त्रिकालदर्शी उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 27 अगस्त 2022 प्रातः में झारसुगुड़ा (ओडिशा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि नामदान लेने वाले नए लोगों को नाम दान समझाना, पुराने लोग अपनी ड्यूटी, सेवा समझो। ये आपकी छोटी-मोटी नहीं, बड़ी सेवा मानी जाएगी। आप सफाई, भोजन, पानी पिलाना, दान पुण्य आदि ये छोटी सेवा मानी जायेगी लेकिन जीवात्मा को खुराक दिलाना बड़ी सेवा है। किसी को नामदान दिलाना, सुमिरन ध्यान भजन समझा देना, इनमें लगा देना और अंतर में जीवात्मा को खुराक दिला देना, यह बहुत बड़ी सेवा मानी जाती है।

पुराने प्रेमी, नये नामदानियों को सुमिरन ध्यान भजन समझाकर करवाकर पक्का बना दो ये आपकी है जिम्मेदारी

पुराने नामदानी प्रेमी अपने-अपने हिसाब से किसी भी तरह से नयों को हिंदी में या उड़िया में या जैसे समझें, समझा दो, याद करा दो। सुमिरन ध्यान भजन उसको करवा करके बिल्कुल पक्का बना दो। यह नहीं कि बस लाए नामदान दिला दिया, जिम्मेदारी खत्म हो गई। जिम्मेदारी अब आपकी और बढ़ गई।

बगीचे की सिंचाई गुड़ाई न करो तो फ़ल नहीं लगेगा

बगीचा लगाना कहते हैं बड़ा अच्छा रहता है, फ़ल बहुत से लोगों को खाने को मिलेगा। लेकिन रखवाली न करो, सिंचाई गुडाई न करो, पौधे के रूप में आगे बढ़ाओ नहीं तो कैसे फल लगेगा इसलिए समझो, इनको सुमिरन ध्यान भजन समझा करके कराना है।

तरीके से अगर ध्यान लगाओगे तो उजाले में चले जाओगे

एक चीज और समझ लो। अभी (सतसंग में) आपको आंख बंद करके ध्यान लगाना बताऊंगा। जैसा बताऊंगा, उस तरीके से अगर ध्यान लगाओगे तो उजाले में चले जाओगे। ऊपर उजाला ही उजाला है। कहा है-

 बिना भूमि एक महल बना है तामे ज्योति अपारी रे।
 अंधा देख-देख सुख पावे बात बतावे सारी रे।।

 वहां जो भी मकान बने दिखते हैं, सब एकदम उजाले में हैं। चमकीले मणियों और मोतियों से बने हुए, घर में रोशनी ही रोशनी, कोई हाइलोजन गैस मोमबत्ती की लाइट वहां नहीं चलती।

ऊपर जर्रे-जर्रे में रोशनी कण-कण में प्रकाश है

वहां जर्रे-जर्रे में रोशनी, कण-कण में प्रकाश ही प्रकाश है। जब आप प्रकाश की ओर जाओगे, उसको देखोगे, वहां के पशु-पक्षियों को, नक्काशी को, करोड़ों योजन के पेड़ जब देखोगे तो खुश हो जाओगे और खुश होकर के जब दूसरे को बताने लग जाओगे, जैसे बताओगे तैसे ही वो बंद कर देगा। फिर न कुछ दिखाई न सुनाई पड़ेगा। बड़ी तड़प जगेगी कि हमको देखने सुनने को मिल जाए लेकिन जल्दी से मिलेगा नहीं। यह दो बात याद रखना- नामदान किसी को बताना नहीं है और अंदर में जो दिखाई सुनाई पड़े, उसको किसी को भी नहीं बताना है। अब आपको नामदान दूंगा।




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