प्रारब्ध भाग्य में लिखे दुःख को दूर करने का तरीका सन्तों के पास होता है, खोज लो, मिल जाएंगे

जय गुरु देव

प्रेस नोट: 10.09.2022, इंदौर (मध्य प्रदेश)

कलयुग और सतयुग के संघर्ष, खून-खराबा से लोगों को बचाने की जरूरत है

 जिनको गुरु के वचन याद नहीं वही भटक गये, भटकाव फैलाने वाले आगे और बढ़ेंगे

इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु त्रिकालदर्शी उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 6 सितंबर 2022 सायं इंदौर आश्रम में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि गुरु के वचनों को याद रखना, सुनते रहना चाहिए तो भटकाव नहीं होगा। नहीं तो गुरु को, गुरु के वचनों को भूलने पर भटकाव हो जाता है क्योंकि यह दुनिया मृत्युलोक परिवर्तनशील है। यहां बदलाव होता रहता है, एक जैसा नहीं रहता। भटकाव आगे चल करके और भी होगा। 


 जिनको गुरु के वचन याद नहीं वही भटक गये, भटकाव फैलाने वाले आगे और बढ़ेंगे

अभी संगतों में जिनको गुरु के वचन याद नहीं है, जो गुरु के वचनों से दूर हो रहे हैं वह लोग भटक रहे हैं। भटकाव करने, फैलाने वाले अभी और बढ़ेंगे। रास्ता मिलते हुए भी, गुरु महाराज जैसे समरथ गुरु मिलते हुए भी लोग भटक जाएंगे इसलिए हमारा आपका यह फर्ज बनता है कि लोगों को भटकने से हम बचाएं और गुरु के प्रति श्रद्धा प्रेम बनाए रखें, गुरु के वचनों को बराबर याद दिलाते रहें।

भाग्य प्रारब्ध के दुःख को लोग कोसते हैं लेकिन पूरे सन्त उसे बदल सकते हैं

देखो लोग दु:खी हैं और दु:ख बढ़ता चला जा रहा है। आदमी सोचता है कि हमारे प्रारब्ध भाग्य में यही है। उनके दुःख को दूर किया जा सकता है। दु:ख दूर करने का तरीका कोई नहीं खोज पा रहा है। रोटी-रोजी, घर मकान, मान प्रतिष्ठा बढ़ाने आदि के लिए दिन-रात आदमी दौड़ रहा है। जितना दौड़ता है उतनी ही परेशानी बढ़ती चली जा रही है। हविश किसको कहते हैं? यह भी मिल जाए, वह भी मिल जाए, ऐसा-वैसा हो जाए। इच्छाएं आदमी की बढ़ती चली जा रही हैं। जब इच्छाएं हविश बढ़ जाती है तब शरीर जिसके लिए इच्छा बढ़ती है, इसी शरीर से पाप बुरे कर्म होने लग जाते हैं। बुराई और अच्छाई एक जगह रह नहीं सकती। गुरु भक्ति और दुनिया की भक्ति एक साथ कैसे रह सकती है? नहीं रह सकती।

कलयुग के असर से लोगों को हो रही है तकलीफें

यह किसका असर है? यह कलयुग चल रहा है। कलयुग में यह तकलीफें रहती ही रहती हैं। तकलीफ और बढ़ती हैं। गुरु महाराज कहा करते थे, कलयुग में कलयुग जाएगा और कलयुग में सतयुग आएगा। वह तो होना ही होना है। सन्तों की बातें गलत नहीं हो सकती हैं। सन्त वचन पलटे नहीं, पलट जाए ब्रह्मांड। सन्त की बोली सन्त की बात कभी गलत नहीं होती है। गुरु महाराज की कही बात तो होना ही होना है लेकिन कलयुग और सतयुग एक जगह कैसे रह सकते हैं? नहीं रह सकते। कलयुग जब हटेगा तब तो सतयुग आयेगा।

कलयुग और सतयुग के संघर्ष में बहुत होगा खून खराबा

जब किसी को कहीं बैठना होता है जो दूसरा (पहले से) बैठा होता है उसको हटाना होता है। तो कलयुग को सतयुग हटाएगा। कलयुग हटना नहीं चाहेगा तो संघर्ष लड़ाई भी हो सकती है दोनों में, बहुत खून खराबा हो सकता है, कुछ भी हो सकता है। उससे लोगों को बचाने की जरूरत है कि जिससे अच्छे समय को लोग देख लें।

दीपक को जब बुझना होता है तो बहुत तेज भभकता है, कलयुग जाने से पहले अपना प्रभाव जताएगा

कुछ अपने प्रेमी ही भटक जाते हैं क्योंकि समझाने बताने वाला कोई उनको नहीं मिलता है। यह जो सतयुगी रास्ता गुरु महाराज ने बता दिया, यह जो डोर पकड़ा दी, सतयुग के तरफ उनका ध्यान आकर्षित करा दिया, उधर से उनका ध्यान हट जाता है और कलयुग के प्रभाव में आ जाते हैं। अभी तो यह आगे बहुत बढ़ेगा, कलयुग अपना प्रभाव जताएगा। जब दीपक को बुझना होता है तो बहुत तेज जलता है। जब कलयुग जाने को होगा तो बहुत तेज जलेगा। उसकी तेजी देख कर उसके प्रभाव में लोग फंस जाएंगे। जैसे धीरे-धीरे कोई दीपक जल रहा हो तो उसके नजदीक के छोटे कीड़े ही उसे देख पाते हैं। और जब लौ तेज जलती है तो दूर-दूर के कीड़े पतंगे उसमें आ जाते हैं। वह नहीं देख पाते हैं कि हम इसमें जल जाएंगे कि बहुत तेज जल रहा है। ऐसे ही कलयुग की ज्वाला में, इधर-उधर भटकाव में कई लोग फंस न जाएं इसके लिए आप सब लोग जहां रहते हो, बराबर प्रेमियों की निगरानी करते रहो कि वे कलयुगी गुण में, भटकाव में न आ जाएं। इस चीज का सबको ध्यान रखने की जरूरत है।

प्रेमियों! कर्मों को काटने के लिए प्रचार प्रसार में लगो

बुद्धि लोगों की कैसे सही होगी? जब आप लोग सेवा भाव में लगोगे, थोड़ा खान-पान चाल-चलन को सही रखोगे, उस मालिक को याद करते रहोगे, सुबह-शाम खाली समय में बराबर गुरु महाराज को याद करते रहोगे, सुमिरन ध्यान भजन, प्रचार-प्रसार द्वारा शरीर से जान-अनजान में बने कर्मों को काटोगे तभी यह संभव मुमकिन हो पाएगा। बोलो जयगुरुदेव।



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