जय गुरु देव
प्रेस नोट: 16.08.2022 रेवाड़ी (हरियाणा)
चंद्र चकोर के समान प्रेम अगर गुरु से थोड़ी देर के लिए भी कर लो तो गुरु तो आपको जलवा दिखाने, ताकत भरने के लिए सदैव तैयार हैं
कम मेहनत में, कम समय में, बहुत आसानी से गुरु को खुश कर उनसे उनकी कृपा आध्यात्मिक दौलत रूहानी खजाना प्राप्त करने का उपाय बताने वाले, भक्तों पर दया की बरसात कर उनमें ताकत भरने को और अंतर में चढ़ाई करवा कर अपना जलवा दिखाने को आतुर, शिक्षाप्रद दृष्टांत किस्से सुनाकर गहरी बात आसानी से समझा देने वाले इस समय धरती पर मनुष्य शरीर में आये स्वयं प्रभु, मौजूदा वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 7 अगस्त 2022 प्रातःकालीन बेला में बावल आश्रम, रेवाड़ी (हरियाणा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि जब आध्यात्मिक गुरु की दया अंदर में हो जाती है तो शब्दों में दबाव ताकत आ जाती है।
ज्यादा पढ़ा-लिखा तर्क-वितर्क में समय खराब करता है और गुरु पर विश्वास कर बताये रास्ते पर चलने वाला प्राप्त कर लेता है
बहुत पहले की बात है। एक आदमी ने मेरे से ही कहा कि मैंने शुरू से किताबें बहुत पढ़ी। एक किताब की लिखी बात का खंडन दूसरी किताब में हो जाता है। तब हमने कहा-
ढाई आखर नहीं पढ़ा? उसने पूछा ढाई आखर क्या होता है? कहा बस इसीकी तो जानकारी करनी चाहिए की ढाई अक्षर पढ़ने से विद्धता आती है। कभी सोचा नहीं? बिन गुरु होय न ज्ञान सुना? बोला हां। रामचरितमानस पढ़ा? बोला हां। पूछा गुरु किसको किया? बोला समझे ही नहीं आज तक कि गुरू किसको बनाएं। पूछा किताबों को तुमने पढ़ा नहीं कि गुरु कैसा होना चाहिए? आपने या तो रामायण, रामचरितमानस नहीं पढ़ा या ध्यान नहीं दिया या भूल गए। कहा श्री गुरु पद नख मनी गन ज्योति। सुमिरत दिव्य दृष्टि हियं होती- यह तुमने नहीं पढ़ा? उसने कहा हां पढ़ा। तब क्या पहचान है गुरु की? कहा हां समझ में आया। तो हमने कहा जब ऐसे गुरु मिलेंगे तब शब्द का आपको ज्ञान होगा। अब अगर सीधे बता दिया होता विद्वान आदमी को तो उसको समझ में नहीं आता। लेकिन तर्क पेश करके उसके सामने बात रखी गई तब उसे कुछ समझ में आया। कहा गुरु के महत्व को समझा? उसने हां में सिर हिलाया। हमने कहा नहीं समझा। अगर समझ गए होते तो जोर से बोलते हैं कि मैं समझ गया। आपने केवल स्वीकृति दी, बात नहीं काटी। हमने कहा कबीर साहब की वाणी पढ़ी? बोला हां। गुरु माथे पर राखिए चलिए आज्ञा माही। कहे कबीर ता दास को तीन लोक भय नहिं।। हमने कहा कौन से गुरु ऐसे हो सकते हैं जिसके लिए कहा गया? धरती सब कागज करूं लेखनी सब वनराय। सात समुंदर की मसि करूं गुरु गुण लिखा न जाए।। आपको तो खोजना परखना देखना चाहिए। तब उसने कहा भाई अब आप मुझे बताओ, उम्र में तो छोटे लेकिन जानकार ज्यादा हो। कहा क्यों? सोचो। सोच कर बोला आप सन्त के पास रहते हो, आश्रम में जाते हो इसलिए। तब बताया कि जब आप इधर समय दोगे, सार तत्व को पकड़ोगे, थोथी नहीं पढ़ोगे तब तो जानोगे नहीं तो इसी में समय निकल जाएगा। विद्वान लोग जल्दी नहीं मानते, तर्क वितर्क, बुद्धि की पहलवानी करते हैं। तो सार को पकड़ना चाहिए।
कृष्ण और विदुरानी का प्रसंग- गुरु से प्रेम हो जाये तो सब हो जाये
विदुर और उनकी पत्नी विदुरानी दोनों कृष्ण के बड़े भक्त थे। एक दिन विदुर कहीं बाहर गए हुए थे और कृष्ण घर पर पहुंच गए। दरवाजे पर आवाज लगाया। विदुरानी स्नान कर रही थी। कृष्ण की आवाज सुनते ही प्रेम में इतना विभोर हो गई कि कपड़ा भी नहीं पहना और भागकर कृष्ण के सामने गई, पाँव छुआ, हाथ जोड़कर बोली महाराज अंदर आईये। घर में कुछ भी नहीं था। भक्ति और माया दोनों स्त्रीलिंग, एक जगह नहीं रहते हैं तो गरीबी रहती है। मुफलिसी में ही प्रभु याद आता है। जिन लोगों ने गुरु महाराज से धन ही मांगा, खूब मिला तो अब उसी में फंस गए, अब बहुत दुःखी, किसी से कह भी नहीं सकते। तो घर में पके हुए केले रखे हुए थे। फल फूल प्राकृतिक चीजों को अगर खाया जाए, अन्न (खाना) कम कर दिया जाय तो स्वास्थ्य काफी ठीक रहता है। तो भाव विभोर नंगी ही भाग कर केले ले आई, खिलाने लगी। कृष्ण ने कहा पगली! कपड़े तो पहन ले। तब उसको ध्यान आया, दौड़ कर गई कपड़े पहने और आई केला छीलकर देने लगी। प्रेम में केले का छिल्का देने लगी और गूदा फेंकने लगी। कृष्ण छिलके के रूप में उसका प्रेम चख रहे थे। और विदुरानी खुश हो रही थी कि मैंने जो दिया उसको कृष्ण प्रेम से खा रहे हैं। इतने में विदुर आ गए बोले अरे यह क्या कर रही है। छिलका दे रही और गूदा फेंक रही है। कभी ऐसे खाते खिलाते देखा? तब उसको होश आया की बहुत बड़ी गलती हो गई है। हाथ जोड़कर माफी मांगने लगी। विदुर गूदा देने लगे और छिलका फेंकने लगे। कृष्ण जब उसको खाए तो विदुर से बोले, इसमें वह स्वाद नहीं है। प्रेम इस तरह का होता है जैसे चंद्र चकोर। इस तरह का प्रेम अगर आप गुरु से थोड़ी देर के लिए भी कर लो तो गुरु तो बेताब हैं जलवा दिखाने के लिए, वो ताकत आप में भरने के लिए सदैव तैयार हैं।
