तीन लोक नौ खंड में भारत देश ही एक ऐसा खंड है जहां महापुरुषों का हुआ अवतार

जय गुरु देव

प्रेस नोट: 30.07.2022 रेवाड़ी (हरियाणा)

भविष्य में होली दीपावली की तरह बाबा जयगुरुदेव का त्रयोदशी मासिक भंडारा पर्व भी भारत में धूमधाम से मनाया जाएगा

इस समय तो बच्चे और बड़े मोबाइल में देखते रहते और जिंदगी कौड़ी के बराबर गवां रहे

विश्वविख्यात सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी, अपने गुरु के अव्वल दर्जे के भक्त, अपने गुरु को, उनके आदेश को ही सब कुछ मानने जानने वाले, गुरु के आदेश का बिना बुद्धि लगाए अक्षरशः पालन करने वाले, अपने गुरु पर पूरा विश्वास रखने वाले, उन्हें हर प्रकार से समरथ और अंग-संग मानने वाले, गुरु के मिशन की पूर्ति में दिन-रात लगे, गुरु की आन बान शान को दिन दूनी रात चौगुनी गति से बढ़ाने वाले, गुरु की पगड़ी पर दाग न लगे इसलिए धन संपत्ति जमीन जायदाद को ठोकर मार कर गुरु की बताई राह पर बैखौफ चल पड़ने वाले, बाहर और अंतर दोनों जगह गुरु के दर्शन, दया और आशीर्वाद पाने वाले वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के प्रति माह कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को मनाए जाने वाले मासिक भंडारा पर्व के शुभ अवसर पर 26 जुलाई 2022 प्रातः कालीन बेला में बावल आश्रम, रेवाड़ी (हरियाणा) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि भारत महात्मा महापुरुषों की भूमि है। तीन लोक नौ खंड बताए गये। इन नौ खंडों में भारत ही एक ऐसा खंड है जहां पर महापुरुषों का अवतार हुआ है, योग साधना करने का माहौल यहीं पर तैयार हुआ इसीलिए इसको योग भूमि भी कहा गया है। बाकी देश, उनकी भूमि भोग भूमि कहलाई। उन लोगों को धर्म कर्म अध्यात्म के बारे में कुछ मालूम ही नहीं है। उन्होंने तो यही सोच लिया है, खाओ बच्चा पैदा करो कमाओ दुनिया से चले जाओ। उन्होंने तो इस चीज को मान लिया है कि मनुष्य शरीर केवल इसी काम के लिए मिला है। 



आगे दीपावली दशहरा आदि की तरह भारत में ये त्रयोदशी का मासिक भण्डारे का त्योहार भी मनाया जाने लगेगा

भारत देश में ऋषि मुनि योगी योगेश्वर सन्त जब आए तो उन्होंने लोगों को आत्मा-परमात्मा, लोकों, प्रकृति, देवी-देवताओं के बारे में समझाया बताया, सारी जानकारी सन्तों ने करवाई। गुरु महाराज ने बहुत मेहनत किया।
तो ये भण्डारा कार्यक्रम को बराबर चलाते रहना है। ध्यान भजन सुमिरन करें, संभव हो कोई सुनाने वाला हो तो सुनावे, गुरु की महिमा को बतावे और प्रसाद के रूप में वितरण हो जाया करे। तो ये बराबर नियम चलता रहेगा। आगे चलकर के जैसे दीपावली दशहरा अन्य तीज त्योहार भारत देश में मनाए जाते हैं उसी तरह से ये त्रयोदशी का मासिक भण्डारे का त्योहार भी मनाया जाने लगेगा। ये तीज त्योहार विशेष समय पर आते हैं। मासिक भंडारे की तिथि अपने लिए विशेष है। तो सन्तों के देश में तीज त्योहार बहुत मनाये जाते हैं। हर तीज त्योहार के साथ कुछ न कुछ इतिहास जुड़ा हुआ होता है। 

तीज त्योहार में पिछले कार्यों की करना चाहिए समीक्षा

ये केवल खाने-पीने का दिन नहीं होता है। खाना खिलाने से ही त्योहार मनाए जाने वाला नहीं होता है। जिस उपलक्ष्य में यह त्यौहार मनाए जाते हैं उनके कार्यों को देखना है, समीक्षा करना है और अच्छाई को अपनाना है। सन्त मेहनत करके लोगों के जेहन में बैठा देते हैं, लोगों को मेहनत करना सीखा देते हैं, मेहनत का फल ले आते हैं तो लोगों का लोक-परलोक बन जाता है। सन्तों ने कहा है-
मनुष्य जन्म अनमोल मिला, तू इसे चाहे कमा बाबा।
तू दीन कमा या दुनिया कमा, या हरि के हेत लगा बाबा।।
कहते हैं-
हीरा जन्म अनमोल मिला और कौडी बदले जाए।

इस समय तो बच्चे और बड़े मोबाइल में देखते रहते और  जिंदगी कौड़ी के बराबर गवां रहे

कौडी किसको कहते हैं? कौडी उस समय की युक्ति है जब कौड़ी बच्चे खेला करते थे। तो कौड़ी की कोई खास कीमत नहीं होती है। कौडी है, कंचा है, ऐसे पत्थर के टुकड़े से खेला करते थे बच्चे लोग। अभी इस समय तो खेल के बहुत सारे साधन हो गए हैं। अब इस समय तो खाली उंगली चलाते रहते हैं बच्चे, मोबाइल में खेल खेलते रहते हैं। देखते रहते हैं उसी में छोटे-छोटे बच्चे। पहले तो खेल इसलिए खेलते थे कि शरीर का व्यायाम हो जाये, रोग रहित हो जाए। शरीर से जब आदमी कुछ करता रहता है तो शरीर हरकत में रहता है, जो अन्न खाता है वह पच जाता है और विकार नहीं पैदा होता है। बैठने से विकार पैदा होता है। तो कौडी बदले जाए। इस मनुष्य शरीर की कोई कीमत लगा ही नहीं सकता, न भौतिक रूप से और न आध्यात्मिक तूप से। इसी मनुष्य शरीर रूपी मंदिर के अंदर खजाना भरा हुआ है।

जब जानकार सतगुरु मिलते हैं तो इसी मनुष्य शरीर में भरे खजाने का पता चलता है

जैसे मंदिरों में लोग जाते हैं, मूर्तियों के सामने मत्था पटकते हैं, फूल पत्ती प्रसाद चढ़ाते हैं, कहते हैं कि देवता खुश हो जाएंगे तो हमको सब कुछ दे देंगे। इसी तरह से इस मनुष्य शरीर के अंदर सब कुछ छुपा हुआ है। क्या आदमी को मिल जाय? कोई जानकार मिल जाए और वह बता दे तो क्या न मिल जाए लेकिन अज्ञानता में आदमी इधर-उधर धन, मान, प्रतिष्ठा, भगवान, शांति की खोज में भगता रहता है। जब भेदी जानकार गुरु मिल जाता है तब अंतर में ही प्राप्त करने का रास्ता बता देता है।




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