सब कुछ शरीर के रहते-रहते ही मिलता है - बाबा उमाकान्त जी महाराज

 जय गुरु देव 

 प्रेस नोट: 20.09.2022 उज्जैन (म.प्र.) 

पहले गुरु भक्ति करो, गुरु खुश हो गए तो कभी भी कहीं भी कोई भी दिक्कत नहीं होगी

साकार गुरु की खोज करनी चाहिए

जिसने भगवान को नहीं देखा उसके लिए निराकार और जिसने देखा उसके लिए साकार तो इसी जीवन में साकार प्रभु के दर्शन कराने वाले, प्रभु के गोपनीय भेद आदि नाम जिसकी महिमा ग्रंथों में है लेकिन लोग गहराई जान समझ नहीं पाते वो नाम की दौलत देने वाले, आत्मा के उद्धार के लिए सबसे पहले जिस गुरु भक्ति की जरूरत होती है उसे बताने समझाने वाले, मृत्यु के बाद किसी चीज की कोई गारंटी नहीं तो सर्व साधारण के जीते जी ही दिव्य दृष्टि खोलने वाले, फोटो मूर्ति के नहीं बल्कि देवी-देवताओं के दर्शन कराने वाले, तकलीफों को आने से ही रोक देने वाले इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु त्रिकालदर्शी साकार गुरु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 12 अगस्त 2022 दोपहर राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) में दिए गए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि आदि नाम जपने से ही मुक्ति होती है।


आदि नाम गुप्त जपने से ही मुक्ति होती है

कोटि नाम संसार में ताते मुक्ति ना होय।
आदि नाम जो गुप्त जपे बिरला समझे कोई।।

ये नाम जो मैं आपको बताऊंगा ये आदि नाम है। शुरुआत जहां से हुई वहां से यह नाम उतरा है और जब तक यह संसार दुनिया रहेगा तब तक यह नाम रहेगा, यह खत्म होने वाला नहीं है। गुप्त जप यानी थोड़ा एकांत बना करके जपना रहेगा। जो उसको करेगा वही विरला ही कोई उसको समझ पाएगा। तो वह नाम बताऊंगा। आप लोग रामायण रामचरितमानस पढ़ते सुनते होंगे। उसमें भी लिखा है-

कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर सुमिर नर उतरही पारा।
नाम लेते भव सिंधु सुखाई, सुजन विचार करो मन माही।।

जिस नाम को लेते ही भवसागर सूख जाए, वो नाम का दान आपको दूंगा।

पहले गुरु भक्ति करो

महाराज जी ने 1 सितंबर 2022 दोपहर वलसाड़ (गुजरात) में दिए गए संदेश में बताया कि पहले गुरु भक्ति करो।

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने जिन गोविंद दियो बताए।।

गुरु ही भगवान की पहचान, दर्शन कराते हैं। पहले गुरु की भक्ति करो। उससे जब गुरु खुश हो जाएंगे तब समझो कोई रुकावट दिक्कत कहीं भी किसी भी लोक में नहीं होगी, चाहे अंड पिंड ब्रह्मांड हो या अन्य ऊपर के लोक हो या मृत्युलोक (पिंड लोक) हो, कोई दिक्कत यहां भी नहीं हो सकती है, ऊपर भी चढ़ाई में साधना में कोई दिक्कत नहीं हो सकती है। लेकिन गुरु खुश नहीं हो पाते हैं क्योंकि तन काला मन काला और सब कुछ काला ही दिमाग में रहता है, काली ही बातें रहती है तो कहां से साफ हो पाएगा, कहां से गुरु दिख पाएंगे? काले रंग का चश्मा लगा लोगे और सूरज को देखोगे सूरज सफेद दिखाई पड़ेगा? तो सब दिल दिमाग बुद्धि काला हो गया तो कहां से गुरु की दया मिलेगी?

तन मन से सच्चा रहे सतगुरु पकड़ी बांह।
काल कभी रोके नहीं देवे राह बताए।।

उसको राह मिलता है जो सतगुरु का बांह पकड़ लेता है। बांह पकड़ने का मतलब है गुरु जैसा बतावे, गुरु की वाणी वचन को पकड़ो। केवल कहने को रहता है कि गुरु महाराज सब आपका है, तन मन धन सब संतन को अर्पण लेकिन मन उधर लगा रहता है, काला रहता है तब दया नहीं मिल पाती।

साकार गुरु की खोज करनी चाहिए

महाराज जी ने 12 अप्रैल 2020 सांय उज्जैन आश्रम में दिए गए संदेश में बताया कि साकार गुरु की जरूरत होती है तभी साकार परमात्मा मिलता है, उसका दर्शन होता है। वह जो निराकार देवी देवता जिनका दर्शन अंतर में होता है कब? जब साकार गुरु रहते हैं, जानकार मिलते हैं, रास्ता बताते हैं तभी उनका दर्शन हो पाता है, उनसे कोई चीज मिल पाती है। तो सबसे पहले साकार गुरु की खोज करनी चाहिए। जैसे दादा के पिताजी के शरीर छोड़ चुके मास्टर डॉक्टर वकील से हम भी अपना काम करवा लें तो नहीं हो सकता, मौजूदा मास्टर डॉक्टर वकील की जरूरत रहेगी। वक्त के जानकार गुरु की जरूरत होती है। अगर वह मिल जाए और तब उनकी करो गुरु भक्ति। मतलब उनके आदेश के पालन करना तब वह खुश होकर आपको लोक-परलोक दोनों बनने की बात बताएंगे। वो आदेश इस तरह का देते हैं जो सबके लिए फायदेमंद हो और सब लोग कर सके। जनरल (सामान्य) आदेश सबके लिए होता है। व्यक्तिगत आदेश किसी-किसी के लिए ही होता है। तो जनरल आदेश का पालन करना चाहिए। सभी लोग गुरु महाराज की बातों को पकड़ो।

सब कुछ शरीर के रहते-रहते ही मिलता है

महाराज जी ने 18 अप्रैल 2020 सांय उज्जैन आश्रम में दिए गए संदेश में कि                                                            सकल पदारथ है जग माही।
कर्म हीन नर पावत नाही।।

सब कुछ इसी दुनिया में संसार में, इसी मनुष्य शरीर में है। जो कुछ आदमी को मिलता है इस शरीर के रहते-रहते मिलता है। शरीर छूटने के बाद कुछ नहीं मिलता। फिर न तो किसी को देवी-देवताओं का दर्शन हुआ न स्वर्ग बैकुंठ का आनंद मिला न कोई अनहद वेद वाणी सुना न कोई भगवान का दर्शन कर पाए न अपने घर जा पाया। शरीर छूटने के बाद कर्मों की सजा मिलने लगती है। आदमी को सजा मिलने लग जाए तो भी एक चेतावनी समझना चाहिए कि हमसे गलती बन रही है जिसकी वजह से कुदरत हमको यह सजा दे रही है अब हम गलती दुबारा न करें जिससे कुदरत सजा फिर न दुहरावे। वह होशियार कर रही है। कोरोना रोग कुदरत की चेतावनी है कि गलती करोगे, दूसरे का हक छीनोगे दूसरे का भोजन खाओगे (मांसाहार), पूजा  इबादत प्रार्थना के लिए मिले मनुष्य शरीर रूपी मंदिर इंसानी मस्जिद गुरुद्वारा जिसके अंदर के दरवाजे से गुरुओं का दर्शन होता है, इससे से गुनाह करोगे तो सजा मिलेगी।



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