बाबा उमाकान्त जी महाराज अनमोल दौलत नामदान के बदले दक्षिणा में छुड़वाते हैं बुराइयां

 जय गुरु देव

प्रेस नोट: 27.08.2022, महोबा (उ. प्र.)

वक़्त के महापुरुष के मुख से नामदान सुनना होता है जरूरी

ऊपरी लोकों का आनंद हजम करना चाहिए

जब महात्मा जाने लगते हैं तब अपनी शक्ति अपने उत्तराधिकारी जानशीन में समाहित कर देते हैं और अपने नामदानियों की संभाल भी उन्ही को सौंप देते हैं। विश्वविख्यात निजधामवासी बाबा जयगुरुदेव जी महाराज जिनको अपने शरीर छोड़ने से 5 वर्ष पूर्व 2007 में सतसंग मंच से सार्वजनिक रूप से अपना उत्तराधिकारी जानशीन घोषित करके गए, नए-पुरानों की संभाल का स्पष्ट आदेश दे कर गए, जिनमें अपनी पूरी पावर भरकर गए, जो बाबाजी सन 1952 से 2012 तक अपने सतसंग में समझाते रहे कि वक़्त के सन्त सतगुरु से ही जीवात्मा का काम होगा, टेकी बनने मिट्टी-पत्थर की बिल्डिंग जमीन-जायदाद धन-संपत्ति में फंसने, खाली किताबें पढ़ने रटने से कुछ नहीं मिलेगा, ऐसे परम सन्त के उत्तराधिकारी इस समय के पूरे समरथ सन्त सतगुरु त्रिकालदर्शी उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने जन्माष्टमी कार्यक्रम में 18 अगस्त 2022 को दोपहर में महोबा (उ. प्र.) में दिये संदेश में बताया कि आपको नामदान दिया जाएगा।

नामदान के बदले में दक्षिणा में देना क्या है

 लेकिन इस अनमोल दौलत के बदले गुरू दक्षिणा में देना क्या है? लोटा धोती लंगोटी देने की जरूरत नहीं है। आप अपनी बुराइयों को यही छोड़ जाओ। अभी तक जो आपने बुरा कर्म किया अब मत करना। मांस मछली खाकर अपने खून को भी बेमेल किया, बीमारियां झेले, वह काम अब मत करना। मांस मछली अंडा मत खाना, दूसरी औरत के साथ बुरा कर्म मत करना। बच्चियों! दूसरे पुरुष के साथ बुरा कर्म मत करना। बाकी आप आजाद हो। हजम कर सको तो 100 गिलास दूध रोज पी लो, 2-4 किलो रोज घी खा जाओ हम मना नहीं करते है। आपके पास है तो अच्छा कपड़ा पहनो, अच्छे मकान में रहो।

ऊपरी लोकों का आनंद हजम करना चाहिए

ध्यान लगाओगे ऊपरी लोकों में जब आप जाओगे, देवलोक चंद्रलोक आदि जब जाओगे, वहां का दृश्य नजारा जब अंदर में देखोगे, जो वेद वाणी अनहद वाणी आकाशवाणी को जब सुनोगे तो मस्त हो जाओगे। और मस्त हो करके हजम नहीं कर पाओगे। लोगों को बताने लगोगे। लेकिन जैसे बताओगे वैसे ही वह कर देगा बंद। कहेगा यह अनमोल दौलत मैंने इसको दिया संभाल कर रखने के लिए। यह लुटा दिए। फिर इनको नहीं देने का। उसके लिए बड़ी तड़प पैदा होगी। मीरा देखो पागल हो जाती थी।

रात दिना मुझे नींद न आवे, भावे अन्न न पानी रे।

कहती थी कोई मेरे पिया पति परमेश्वर का दर्शन करा दे। है कोई वैद्य जो मेरी पीड़ा को खत्म कर दे।

वक़्त के महापुरुष के मुख से नामदान सुनना होता है जरूरी

जिसके लिए महापुरुष नाम दान देने के लिए आदेश देकर के जाते हैं उसके मुंह से सुनना जरूरी होता है। पीपल पाकड़ और रसाल पेड़ के बीज अगर सीधे जमीन पर गिर जाए तो जमता उगता नहीं है। चिड़िया उसके फल को जब खाती है, उसके मुंह में से जब बीज बाहर गिरता है तब उगता है। ऐसे ही वक्त के महापुरुष से नामदान उनके मुख से सुनना जरूरी होता है।

बाबा उमाकान्त जी महाराज के अनमोल वचन

गुरु तो बेताब हैं ऊपर का जलवा दिखाने के लिए, आपको थोड़ा प्रयास करने की जरूरत है। गुरु पर विश्वास तब होगा जब आप उनके बताए रास्ते पर चलोगे। गुरु भक्त नरक नहीं जाता है। गुरु भवसागर में डूबते का सहारा हैं। गुरु महिमा उनके सतसंग से समझ में आती है।



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