जय गुरु देव
प्रेस नोट: 06.08.2022 कोटा (राजस्थान)
स्कूल में बच्चों के समान टाइम टेबल बना लोगे तो सब सेट हो जाएगा, सबके लिए टाइम निकल आएगा
आप कितने भी बिजी हो, खाने, नहाने, लेट्रिन जाने के समान अपनी आत्मा के कल्याण के लिए भी समय निकालो
ऐसे समर्थ महापुरुष जिनके दर्शन करने, सतसंग सुनने, अपनी बात कह देने तथा उनके बताए रास्ते पर चलने से बहुत लोगों को हर तरह की तकलीफों में लाभ मिल जाता है, कोई भी आजमाइश करके देख सकता हैं, ऐसे वक़्त के महापुरुष सन्त सतगुरु दुःखहर्ता त्रिकालदर्शी परम दयालु उज्जैन वाले बाबा उमाकान्त जी महाराज ने 5 अगस्त 2022 प्रातः कालीन बेला में कोटा (राजस्थान) में दिए व अधिकृत यूट्यूब चैनल जयगुरुदेवयूकेएम पर लाइव प्रसारित संदेश में बताया कि गर्भ में जब उल्टे टँगे थे तब जो वादा प्रभु से किया था उसे याद करो।
सब तजि भजन करहु दिन राती।।
हे प्रभु! (गर्भ से बाहर निकलकर) मैं दिन-रात भजन करूंगा, मेरे ऊपर कृपा दया करो। सब लोगों ने वादा किया था, उस वादे को याद करना चाहिए। आप कहोगे हमको गृहस्थी देखना है, इसी काम में लगेंगे तो दुकान बंद हो जाएगी, खेती कैसे होगी? हर आदमी को रात दिन कुल मिला करके 24 घंटे का समय मिला है। इसका अगर टाइम टेबल बना लिया जाए तो समय बेकार नहीं जाता है, सब सेट हो जाता है।
जैसे स्कूल में बच्चा टाइम टेबल बनाता है ऐसे ही आत्मा के कल्याण के लिए आप भी बनाओ
जैसे बच्चा होता है, हिंदी इतनी, अंग्रेजी इतनी, भूगोल इतनी देर पढ़ेंगे। जैसे स्कूल में घंटा लगता है इसी तरह से घर में अगर टाइम टेबल बना लिया जाए तो जीवन का समय जो जीने के लिए मिला है, यह बेकार नहीं जाएगा। नहीं तो आदमी ऐसे ही हंसी ठिठोली में, बेकार बैठकर अपने जीवन का समय निकाल देता है। सबको निश्चित समय से ही शरीर को खाली कर देना पड़ेगा। जब जीवात्मा शरीर से निकल जाएगी तब इसकी कोई कीमत नहीं रह जाएगी। इस समय इसकी बहुत बड़ी कीमत है, इसके लिए देवता तरसते रहते हैं।
जीव चराचर याचक तेहि।।
जितने भी चर-अचर के जीव हैं, कहते रहते हैं, थोड़े समय के लिए हमको यह मनुष्य शरीर मिल जाए तो हम अपना काम बना लें। अपना काम क्या है? जीवात्मा को परमात्मा तक पहुंचा देना, जन्मने और मरने की पीड़ा से छुटकारा ले लेना। गृहस्थ आश्रम में कुछ-कुछ, लड़ाई-झगड़ा हो रहा, बीमारियां लगी हुई, परेशानी आ रही हैं इनसे छुटकारा ले लेना, यह है अपना काम। यह समय निकल जाएगा। इसी में टाइम टेबल बनाना चाहिए।
कितना भी बिजी हो इंसान, खाना नहाना लैट्रिन के लिए समय निकलता है ऐसे ही आत्मा को तफलीफों से बचाने के लिये समय निकालो
देखो आप कोई भी कितना भी बिजी रहते हो खेती दुकान दफ्तर के काम में लेकिन समय सबके पास रहता है। जैसे मौका निकाल कर भोजन, लैट्रिंग, नहा लेते हो ऐसे ही अपनी आत्मा को जगाने के लिए मालिक के पास पहुंचाने के लिए तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए समय निकालने की जरूरत है।
24 घंटे में से 22 घंटा आपके लिए पर्याप्त है, 2 घंटा समय अपनी आत्मा के लिए निकालो
देखो शरीर के पालन-पोषण के लिए भोजन कपड़े का इंतजाम कर लो, रहने के लिए घर बना लो, मान प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए अच्छा काम कर सब मेहनत ईमानदारी से कर लो। आप रहो गृहस्थ आश्रम में लेकिन इन चीजों के लिए 24 घंटे में से 22 घंटे का समय आपके लिए बहुत है। और अगर आप टाइम टेबल जीवन का बना लो तो उससे भी कम समय में यह सारा काम आप कर सकते हो, हो जाता है।
जिस तरफ जब जिसकी लगन लग जाती है तो समय अपने आप निकल आता है
देखो उसी काम को आदमी धीरे-धीरे करता रहता है और जब कोई जिम्मेदारी आ जाती है कि हमको ट्रैन, मुकदमा, लैट्रिन जाना, खाना खाना है तो जल्दी और ज्यादा काम हो जाता है। और जब लगन लग जाती है कि हमको सतसंग में जाना ही जाना है, भजन पूजन करना है, सतसंगियों के पास उठना-बैठना है, हर चीज को सीखना है तो उसका समय निकल आता है।
आदमी के नीयत में जब खोट आती है तो बरकत बंद हो जाती है
देखो आप बहुत मेहनत करते हो लेकिन पूरा नहीं पड़ता है। उसका यही कारण है कि जैसी नीयत वैसी बरकत होती है। नीयत जब खोटी हो जाती है तो बरकत बंद हो जाती है। मेहनत और ईमानदारी को आदमी जब भूल जाता है, बरकत बंद हो जाती है तो परेशानी आ जाती है तो कहते हो हम नहीं करेंगे तो पूरा ही नहीं होगा। उस मालिक को भूल जाते हो जो पैदा होने के पहले मां के स्तन में दूध भर देता है, देता वो है, खिलाता वो है, उसी को भूल जाते हो। देखो मोटी बात समझो 22 घंटा शरीर के लिए करो और 2 घंटा जो मैं तरीका सच्चा भजन पूजन का जीवात्मा के कल्याण के लिए बताउंगा उसे करोगे, जिसको नामदान मिल गया भजन, ध्यान, सुमिरन में जब लग जाओगे तो (जीवन के बाकी) उन कामों में आसानी हो जाएगी। लोग कहने लगते हैं कि भाई ये जहां हाथ डालते हैं वहीं कामयाब हो जाते हैं।